सेंट जोजफ, होलीलैंड, यूरो किड्स इस जैसे विदेशी लगने वाले नामों के सेकेंडरी स्कूलों नेपाल में भर गए हैं। सरकार मान रही है कि सिर्फ नाम ही नहीं स्कूलों का मिजाज भी बदल रहा है और इसलिए नाम बदलने का फरमान जारी किया है।
नेपाल सरकार ने सोमवार को साफ कर दिया कि वह अपने यहां के सेकेंडरी स्कूलों को ऑक्सब्रिज, व्हाइट हाउस और नासा जैसे नाम रखने पर पाबंदी लगाने जा रही है। सरकार को डर है कि देश के स्कूलों से नेपाली संस्कृति गायब हो रही है। लोगों को शायद सरकार की मंशा का पहले से ही अहसास था। पाबंदी लगने के साथ ही विरोध भी शुरू हो गया। देश भर में विदेशी नामों वाले स्कूलों के छात्र और युवा स्कूल के बाहर जमा होकर सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।
नेपाल के शिक्षा मंत्री जनार्दन नेपाल ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, 'हमने स्कूलों को अपना नाम नेपाली में बदलने के लिए सूचना दे दी है। यहां के कानून में यह साफ लिखा गया है, लेकिन कुछ स्कूल इस नियम को तोड़ रहे हैं। उन लोगों को नाम बदलने के लिए बहुत वक्त दिया गया लेकिन अब इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा।' जनार्दन नेपाल ने यह नहीं बताया कि नाम बदलने की आखिरी समय सीमा कब तक है।
नेपाल में पढ़ाई लिखाई पर खर्च होने वाले पैसे का करीब 25 फीसदी विदेशी सरकारों और राहत एजेंसियां देती हैं। यहां का सालाना शिक्षा बजट करीब 65 अरब रुपए का है। पैसे की कमी से जूझ रहे स्कूल दान और छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पश्चिमी देशों के प्रतिष्ठित नामों पर स्कूल का नाम रख देते हैं।
एक अनुमान है कि केवल काठमांडू में ही करीब 250 स्कूल ऐसे हैं जिनके नाम यूरोप और अमेरिका के सम्मानित महापुरुषों, संस्थाओं या जगहों के नाम पर हैं। आइंस्टाइन एकेडमी और पेंटागन कॉलेज कुछ इसी तरह के उदाहरण हैं।
पिछले महीने ही संयुक्त राष्ट्र ने नेपाल के स्कूलों में फैल रही हिंसा पर गहरी चिंता जताई थी। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि उग्रवादियों की हिंसा से बच्चों का जीवन और शिक्षा का अधिकार खतरे में पड़ गया है।
स्थानीय मीडिया ने कई राजनीतिक दलों की छात्र शाखाओं पर काठमांडू के कॉलेज में कंप्यूटरों को नुकसान पहुंचाने और राजधानी की कई स्कूलों के बसों में आग लगाने का आरोप लगाया है। दक्षिण में चितवन और पूर्वी इलाके के शहर धारन में भी ऐसी घटनाओं की खबर मिली है। आग लगाने वाले स्कूलों के विदेशी नाम का विरोध कर रहे थे।
यूनीसेफ के मुताबिक नेपाल के केवल 46 फीसदी लड़के और 38 फीसदी लड़कियां ही सेकेंडरी स्कूल तक जा पाते हैं। सेकेंडरी स्कूल के आगे पढ़ाई करने वालों की तादाद तो और भी कम है। ज्यादातर युवा बहुत कम पढ़े लिखे और बदलती अर्थव्यवस्था की चुनौतियों का सामना करने में अक्षम साबित हो रहे हैं।
अगर लोगों को शिक्षा के जरिए ताकतवर बना कर देश के लिए भविष्य तय करना हो, तो नेपाल इसमें काफी पीछे रह जाएगा। मौजूदा नीतियां और राजनीतिक दखलंदाजी भी शिक्षा का भला करने में नाकाम हो रही हैं।
7 अग॰ 2012
3 अग॰ 2012
शूटर विजय ने जीता सिल्वर मेडल
सिंहासन छोड़ो जनता आती है: जनरल वीके सिंह
अन्ना हजारे के अनशन स्थल पर पहुंचे जनरल वीके सिंह ने मंच से लोगों में
एक तरह से जैसे नया जोश भर दिया. आंदोलन के बारे में बोलते हुए पूर्व
सेनाध्यक्ष ने कहा कि भ्रष्टाचार सब समस्याओं की जड़ और यह आंदोलन उसी
भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए है.
उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ने वालों की राह कठिन है और
भ्रष्टाचार से लड़नेवालों का दमन होगा. इसके लिए भी आंदोलनकारियों को
तैयार रहना होगा. 1975 के जेपी आंदोलन का उल्लेख करते हुए जनरल वीके सिंह
ने रामधारी सिंह दिनकर की कविता की पंक्तियां उद्धृत करते हुए कहा कि उस
दौरा में एक नारा दिया गया था 'सिंहासन छोड़ो जनता आती है'. उन्होंने कहा
कि आज हालात वैसे ही हो गए हैं इसलिए हमें फिर से उस नारे की जरूरत है.
जनरल सिंह ने कहा कि आज हर आदमी महंगाई से परेशान है. संविधान के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार मिटाने की कोशिश नहीं की गई ना कानूनों का ठीक से पालन हुआ, नहीं तो आज ऐसी स्थिति नहीं आती.
टीम अन्ना द्वारा राजनीति में आने के फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा, 'हमने की थी राजनीतिक विकल्प की अपील और अन्ना ने हमारी अपील को माना है. उन्होंने यह भी कहा कि बड़ा आंदोलन करना होगा और देश को एक और राजनीतिक विकल्प देना जरूरी है.
युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन की असली ताकत युवा ही हैं और अगर युवा चाहें तो देश की तकदीर बदल सकते हैं. सेना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब सेना के लोग अच्छा काम कर सकते हैं तो प्रशासन के लोग क्यों नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अच्छे लोगों को आगे आना चाहिए और जनता ही देश की तकदीर बदल सकती है.
जनरल सिंह ने कहा कि आज हर आदमी महंगाई से परेशान है. संविधान के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश में भ्रष्टाचार मिटाने की कोशिश नहीं की गई ना कानूनों का ठीक से पालन हुआ, नहीं तो आज ऐसी स्थिति नहीं आती.
टीम अन्ना द्वारा राजनीति में आने के फैसले को सही ठहराते हुए उन्होंने कहा, 'हमने की थी राजनीतिक विकल्प की अपील और अन्ना ने हमारी अपील को माना है. उन्होंने यह भी कहा कि बड़ा आंदोलन करना होगा और देश को एक और राजनीतिक विकल्प देना जरूरी है.
युवाओं का उत्साह बढ़ाते हुए पूर्व सेनाध्यक्ष ने कहा कि आंदोलन की असली ताकत युवा ही हैं और अगर युवा चाहें तो देश की तकदीर बदल सकते हैं. सेना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जब सेना के लोग अच्छा काम कर सकते हैं तो प्रशासन के लोग क्यों नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अच्छे लोगों को आगे आना चाहिए और जनता ही देश की तकदीर बदल सकती है.
अब यह देश दिल्ली से नहीं चलेगा
टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने अनशन के मंच से कहा कि यह
आंदोलन अब जनलोकपाल से आगे बढ़कर संपूर्ण क्रांति की राह पर निकल पड़ा है.
अब हमें उसकी तैयारी करनी है. अब सड़क से आगे चलकर संसद का शुद्धिकरण करना
है. अब दोनों जगह आंदोलन होगा.
केजरीवाल ने कहा कि अब यह आंदोलन बहुत बड़ा हो गया है जिसका मकसद सत्ता
को गांव की ओर ले जाना है. इसके लिए हमें संसद में जाना होगा.
केजरीवाल ने कहा कि यह पार्टी नहीं आंदोलन होगा. हम इसके लिए किसानों, बेरोजगारों के बीच में जाएंगे और उनसे सस्याएं पूछेंगे और उनका समाधान तलाशेंगे. हमारा मकसद केवल चुनाव जीतना नहीं है. हमारा मकसद है इन नेताओं और पार्टियों को चुनौती देना. हम अपने चंदे और खर्चे का जिक्र वेबसाइट पर करेंगे और इन राजनीतिक दलों से भी कहेंगे कि वह भी ऐसा करें. हम जनता के जरिए उम्मीदवार खड़ा करेंगे न कि किसी हाईकमान के जरिए.
केजरीवाल ने कहा कि भूखे रहकर हमें किसानों की भूख और देश के लाखों लोगों की भूख का एहसास हुआ. उन्होंने ने कहा कि लोकपाल बिल पारित होने की राह में 15 मंत्री खड़ें हैं जिनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है. लेकिन यह सरकार कुछ नहीं करने वाली. अगर वह लोकपाल बिल पास कर दे तो सभी 15 मंत्री जेल में होंगे.
केजरीवाल ने कहा कि हरेक आदमी भूख, गरीबी और बेरोजगारी से मुक्त भारत का सपना देखता है लेकिन यह कभी हकीकत नहीं हो पाता. अंग्रेजों के समय का कानून 1894 का भूमि अधिग्रहण कानून आज भी जारी है, उसे क्यों नहीं बदला जा सकता. हमें ऐसी शिक्षा पद्धति को भी बदलने की जरूरत है जो आदमी को बेरोजगार बनाता है. आज सब जगह शिक्षा की दुकान खुली हुई है, इसे बदलने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि अब यह देश दिल्ली से नहीं चलेगा. जैसे पहले अंग्रेज लंदन से शासन चलाते थे अब वैसा ही काले अंग्रेज दिल्ली में बैठकर शासन कर रहे हैं. अब हर गांव स्वतंत्र होगा, विकास का मॉडल गांव तय करेगा. केजरीवाल ने कहा कि मैं कांग्रेस को चेतावनी दे देना चाहता हूं. अगर अगले दो साल में जनलोकपाल, राइट टू रिकॉल जैसे कानून को पास कर दें तो हमलोग राजनीति में कदम नहीं रखेंगे.
केजरीवाल ने कहा कि जेपी आंदोलन के बाद यह सबसे बड़ा मौका है इसलिए हम सभी संगठनों से और सभी युवाओं से अनुरोध कर रहे हैं कि वह हमारे साथ आएं.
केजरीवाल ने कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी, एसपी समेत तमाम दलों के साथ लगे युवाओं से कहा कि अगर आप अपने दल के साथ खुश हैं तो ठीक है लेकिन अगर वहां दम घुटता है तो आप देशभक्तों की टोली में शामिल हो जाइए. आपका स्वागत है. इसबार हम बिना पैसे के चुनाव लड़कर जीतना चाहते हैं. अगर जनता साथ है तो सबकुछ संभव है. केजरीवाल ने कहा कि भविष्य भारत का है और अगले तीन साल में भारत भ्रष्टाचारमुक्त होकर रहेगा.
टीम अन्ना ने राजनीतिक विकल्प देने यानी राजनीतिक पार्टी बनाने का फैसला
तो कर लिया लेकिन उसकी राह आसान नहीं होने जा रही. पहले से स्थापित
राजनीतिक दलों से मुकाबला करना टीम अन्ना के लिए निश्चित ही टेढी खीर
साबित होगी. हालांकि जब से अन्ना ने राजनीतिक विकल्प देने की बात कही है
तब से रोजनीतिक पार्टियों की मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.
कपिल सिब्बल- केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने टीम अन्ना को चुनौती देते हुए कहा कि मेरे चुनाव क्षेत्र यानी चांदनी चौक से चुनाव लड़कर दिखाएं. आजतक के साथ एक खास बातचीत में सिब्बल ने कहा कि मैंने हमेशा सच का साथ दिया है. सिब्बल ने कहा कि टीम अन्ना ने हमेशा मुझपर निशाना साधा है. इसके अलावा सिब्बल ने कहा कि कोई भी कानून रामलीला मैदान में नहीं बनता है, कानून संसद में बनता है. सिब्बल ने तो यहां तक कहा कि रामलीला में आंदोलन के दौरन बीजेपी और एबीवीपी ने साथ दिया था लेकिन अब टीम अन्ना उसके खिलाफ भी बोल रही है. टीम अन्ना चांदनी चौक से चुनाव लड़कर दिखाए, पता चल जाएगा. सिब्बल ने कहा कि उनको तो पहले ही आ जाना चाहिए था लेकिन अच्छा हुआ अब पता चल जाएगा.
अंबिका सोनी- सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा था कि टीम अन्ना के इरादे शुरू से ही राजनीति में आने का था, यह इन लोगों का हिडेन एजेंडा था. अब आ रहे हैं राजनीति के मैदान में तो पता चलेगा कि राजनेताओं को किन किन हालातों में काम करना पड़ता है.
दिग्विजय सिंह- कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना के इस नए तेवर का स्वागत किया और कहा कि अब रामदेव भी अपनी पार्टी बनाए और चुनाव के मैदान में हाथ आजमाए. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं तो पहले से ही कहता था, अच्छा हुआ इनलोगों ने खुलासा कर दिया.
बाबा रामदेव- बाबा रामदेव ने इस मुद्दे पर कहा कि अगर अन्ना ने इस प्रकार की घोषणा की है तो वे कुछ सोच समझकर ही किए होंगे. मैं उनके साथ बात करने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा.
नितिन गडकरी- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अन्ना हजारे तथा उनकी टीम के अनशन तोड़ने व राजनीतिक विकल्प प्रदान करने की पेशकश का स्वागत करते हुए शुक्रवार को कहा कि टीम अन्ना उनकी पार्टी का विकल्प नहीं हो सकती. गडकरी ने कहा, 'जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ है, वह अन्ना हजारे या बाबा रामदेव का समर्थन करेगा. यदि अन्ना हजारे हमारा समर्थन चाहते हैं तो हम उनकी मदद करेंगे.' उन्होंने कहा कि टीम अन्ना बीजेपी का विकल्प नहीं हो सकती, लेकिन यह कांग्रेस का विकल्प हो सकती है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को नए समूह की ओर से कोई खतरा नहीं है.
सुब्रहमण्यम स्वामी- जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी पहले ही कह चुके हैं कि टीम अन्ना वास्तव में यही चाहती थी और अब उनका सच सामने आ गया है.
केजरीवाल ने कहा कि यह पार्टी नहीं आंदोलन होगा. हम इसके लिए किसानों, बेरोजगारों के बीच में जाएंगे और उनसे सस्याएं पूछेंगे और उनका समाधान तलाशेंगे. हमारा मकसद केवल चुनाव जीतना नहीं है. हमारा मकसद है इन नेताओं और पार्टियों को चुनौती देना. हम अपने चंदे और खर्चे का जिक्र वेबसाइट पर करेंगे और इन राजनीतिक दलों से भी कहेंगे कि वह भी ऐसा करें. हम जनता के जरिए उम्मीदवार खड़ा करेंगे न कि किसी हाईकमान के जरिए.
केजरीवाल ने कहा कि भूखे रहकर हमें किसानों की भूख और देश के लाखों लोगों की भूख का एहसास हुआ. उन्होंने ने कहा कि लोकपाल बिल पारित होने की राह में 15 मंत्री खड़ें हैं जिनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है. लेकिन यह सरकार कुछ नहीं करने वाली. अगर वह लोकपाल बिल पास कर दे तो सभी 15 मंत्री जेल में होंगे.
केजरीवाल ने कहा कि हरेक आदमी भूख, गरीबी और बेरोजगारी से मुक्त भारत का सपना देखता है लेकिन यह कभी हकीकत नहीं हो पाता. अंग्रेजों के समय का कानून 1894 का भूमि अधिग्रहण कानून आज भी जारी है, उसे क्यों नहीं बदला जा सकता. हमें ऐसी शिक्षा पद्धति को भी बदलने की जरूरत है जो आदमी को बेरोजगार बनाता है. आज सब जगह शिक्षा की दुकान खुली हुई है, इसे बदलने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि अब यह देश दिल्ली से नहीं चलेगा. जैसे पहले अंग्रेज लंदन से शासन चलाते थे अब वैसा ही काले अंग्रेज दिल्ली में बैठकर शासन कर रहे हैं. अब हर गांव स्वतंत्र होगा, विकास का मॉडल गांव तय करेगा. केजरीवाल ने कहा कि मैं कांग्रेस को चेतावनी दे देना चाहता हूं. अगर अगले दो साल में जनलोकपाल, राइट टू रिकॉल जैसे कानून को पास कर दें तो हमलोग राजनीति में कदम नहीं रखेंगे.
केजरीवाल ने कहा कि जेपी आंदोलन के बाद यह सबसे बड़ा मौका है इसलिए हम सभी संगठनों से और सभी युवाओं से अनुरोध कर रहे हैं कि वह हमारे साथ आएं.
केजरीवाल ने कांग्रेस, बीजेपी, बीएसपी, एसपी समेत तमाम दलों के साथ लगे युवाओं से कहा कि अगर आप अपने दल के साथ खुश हैं तो ठीक है लेकिन अगर वहां दम घुटता है तो आप देशभक्तों की टोली में शामिल हो जाइए. आपका स्वागत है. इसबार हम बिना पैसे के चुनाव लड़कर जीतना चाहते हैं. अगर जनता साथ है तो सबकुछ संभव है. केजरीवाल ने कहा कि भविष्य भारत का है और अगले तीन साल में भारत भ्रष्टाचारमुक्त होकर रहेगा.
अन्ना के ऐलान से राजनीतिक दलों में खलबली
कपिल सिब्बल- केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने टीम अन्ना को चुनौती देते हुए कहा कि मेरे चुनाव क्षेत्र यानी चांदनी चौक से चुनाव लड़कर दिखाएं. आजतक के साथ एक खास बातचीत में सिब्बल ने कहा कि मैंने हमेशा सच का साथ दिया है. सिब्बल ने कहा कि टीम अन्ना ने हमेशा मुझपर निशाना साधा है. इसके अलावा सिब्बल ने कहा कि कोई भी कानून रामलीला मैदान में नहीं बनता है, कानून संसद में बनता है. सिब्बल ने तो यहां तक कहा कि रामलीला में आंदोलन के दौरन बीजेपी और एबीवीपी ने साथ दिया था लेकिन अब टीम अन्ना उसके खिलाफ भी बोल रही है. टीम अन्ना चांदनी चौक से चुनाव लड़कर दिखाए, पता चल जाएगा. सिब्बल ने कहा कि उनको तो पहले ही आ जाना चाहिए था लेकिन अच्छा हुआ अब पता चल जाएगा.
अंबिका सोनी- सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा था कि टीम अन्ना के इरादे शुरू से ही राजनीति में आने का था, यह इन लोगों का हिडेन एजेंडा था. अब आ रहे हैं राजनीति के मैदान में तो पता चलेगा कि राजनेताओं को किन किन हालातों में काम करना पड़ता है.
दिग्विजय सिंह- कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना के इस नए तेवर का स्वागत किया और कहा कि अब रामदेव भी अपनी पार्टी बनाए और चुनाव के मैदान में हाथ आजमाए. दिग्विजय सिंह ने कहा कि मैं तो पहले से ही कहता था, अच्छा हुआ इनलोगों ने खुलासा कर दिया.
बाबा रामदेव- बाबा रामदेव ने इस मुद्दे पर कहा कि अगर अन्ना ने इस प्रकार की घोषणा की है तो वे कुछ सोच समझकर ही किए होंगे. मैं उनके साथ बात करने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा.
नितिन गडकरी- भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अन्ना हजारे तथा उनकी टीम के अनशन तोड़ने व राजनीतिक विकल्प प्रदान करने की पेशकश का स्वागत करते हुए शुक्रवार को कहा कि टीम अन्ना उनकी पार्टी का विकल्प नहीं हो सकती. गडकरी ने कहा, 'जो भी भ्रष्टाचार के खिलाफ है, वह अन्ना हजारे या बाबा रामदेव का समर्थन करेगा. यदि अन्ना हजारे हमारा समर्थन चाहते हैं तो हम उनकी मदद करेंगे.' उन्होंने कहा कि टीम अन्ना बीजेपी का विकल्प नहीं हो सकती, लेकिन यह कांग्रेस का विकल्प हो सकती है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी को नए समूह की ओर से कोई खतरा नहीं है.
सुब्रहमण्यम स्वामी- जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रहमण्यम स्वामी पहले ही कह चुके हैं कि टीम अन्ना वास्तव में यही चाहती थी और अब उनका सच सामने आ गया है.
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