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Founder Editor(Print): late Shyam Rai Bhatnagar (journalist & freedom fighter) International Editor : M. Victoria Editor : Ashok Bhatnagar *
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3 फ़र॰ 2013

किरण बेदी ने भी छोड़ा अन्‍ना हजारे का साथ


kiran bedi also left anna hajareनई दिल्ली/ भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष में समाजसेवी अन्‍ना हजारे और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी की राहें भी अलग हो गई हैं। ख्रबर है कि इंडिया अगेंस्ट करप्‍शन का राजधानी स्थिति दफ्तर भी बंद कर दिया गया है। 
अन्ना हजारे आंदोलन से जुड़ी गतिविधियां अब सीधे अपने गांव रालेगण सिद्घी से चला रहे हैं। किरण बेदी ने आंदोलन के लिए चंदा लेना भी बंद कर दिया है। 
उन्होंने कह‌ा है कि जिन्हें अन्ना के आंदोलन की मदद करनी है वे सीधे उनके गांव में संपर्क करें। बेदी ने अन्ना के नाम पर बनाया फेसबुक पेज भी उन्हें लौटाने की पेशकश की है।
गौरतलब है कि भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में अन्‍ना के अहम सहयोगी रहे अरविंद केजरीवाल और प्रशांत भूषण भी उनसे अलग होकर अपना राजनीतिक दल बना चुके हैं। 
अन्ना के एक करीबी सहयोगी ने बताया है कि अब अन्‍ना के आंदोलन का सारा काम उनके गांव रालेगण सिद्धी से चल रहा है। उन्होंने बताया है कि 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' का अब अन्ना से कोई संबंध नहीं होगा। 
गौरतलब है कि अन्ना ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस की थी लेकिन किरण बेदी सहित उनका कोई पुराना सहयोगी इसमें शामिल नहीं हुआ था। यहां पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह उनके साथ थे। 

2 फ़र॰ 2013

मोदी के लिए रास्‍ता साफ, भाजपा संसदीय बोर्ड में मिलेगी जगह


मोदी के लिए रास्‍ता साफ, भाजपा संसदीय बोर्ड में मिलेगी जगहनई दिल्‍ली। गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा अपनी संसदीय बोर्ड का सदस्‍य बना सकती है। मोदी के अलावा मप्र के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और छत्‍तीसगढ़ के मुख्‍यमंत्री रमन सिंह को भी जगह दी जा सकती है। संसदीय बोर्ड में अब तक कोई भी मुख्‍यमंत्री शामिल नहीं है। 
 
इन सब के बीच खबर आ रही है कि कुंभ में छह और सात फरवरी को होने वाले संत सम्मेलन में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। इनमें नरेंद्र मोदी का भी नाम शामिल है। दूसरी ओर, बाबा रामदेव ने भी मोदी को प्रधानमंत्री पद का सबसे बेहतर दावेदार बताया है। वहीं, इलाहाबाद में चल रहे महाकुंभ के दौरान साधु समाज के सम्मेलन में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में घोषित किए जाने की खबर पर जद-यू ने कड़ा ऐतराज जताया है। 
 
जद-यू प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने कहा, ‘यह विडंबना है कि साधु समाज प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम तय कर रहा है। भाजपा एनडीए की बैठक बुलाए और उसमें अपना उम्मीदवार बताए। इसके बजाय जिस तरीके से व्यक्ति विशेष का नाम बार-बार लिया जा रहा है और साधु समाज से समर्थन हासिल करने की कोशिश की जा रही है, यह लोकतंत्र का उपहास है।’ 
 
हालांकि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दैनिक भास्कर से कहा,‘आम चुनाव उसी तरह नेता का ऐलान करके लड़ा जाएगा जैसे अटलजी का नाम आगे रखकर लड़ा गया। भाजपा को अपना उम्मीदवार बताना होगा। अभी तक पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कोई नाम नहीं दिया है।’ 
 
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा, ‘अगर भाजपा मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाती है तो कांग्रेस को प्रसन्नता होगी। तभी लोगों को भाजपा का असली चेहरा देखने को मिलेगा। मोदी के कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं।’ 

गुर्जर महासभा ने दिया 19 तक का अल्टीमेटम.


 जयपुर । राजस्थान गुर्जर महासभा ने 5 फीसदी एसबीसी आरक्षण लागू करवाने के लिए सरकार को 19 फरवरी तक का अल्टीमेटम दिया है।

महासभा के अध्यक्ष कालूलाल गुर्जर ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि एसबीसी आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा साफ नहीं है। सरकार पिछले चार साल से गुर्जर समाज के साथ छलावा कर रही है। सरकार की नीयत साफ होती तो वह पांच प्रतिशत आरक्षण का कानून लागू करवाने से पहले इसका परीक्षण करवाती और इस आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में डलवाती। क्योंकि दोनों जगह ही कांग्रेस की सरकारें हैं।

ओबीसी आयोग ने 50 प्रतिशत के दायरे में सिफारिश करने के बावजूद इससे बाहर आरक्षण देना भी यह साबित करता है कि सरकार आरक्षण देना नहीं चाहती। 50 प्रतिशत की सीमा के भीतर आरक्षण दिया जाता तो यह स्टे नहीं होता।
उन्होंने कहा कि एसबीसी आरक्षण पर रोक से यह जाहिर होता है कि सरकार ने इसमें जानबूझकर कानूनी कमियां छोड़ीं। सरकार जैसे तैसे समय निकालना चाहती है ताकि बाद में यह कह दे कि अब तो आचार संहिता लग गई। सरकार अब 19 फरवरी को हाईकोर्ट में सही तरीके से पैरवी करके पांच प्रतिशत आरक्षण नहीं दिलवा पाई तो गुर्जर समाज चुप नहीं बैठेगा।

उन्होंने कहा कि पूरा समाज एकजुट होकर आंदोलन करेगा। इसके लिए 24 फरवरी को पुष्कर के पास नागपहाड़ पर समाज का बड़ा सम्मेलन होगा। देवनारायण के 1100वें जन्मदिन पर बुलाए जा रहे सम्मेलन में आगे की रणनीति तय होगी। 

अलग पार्टी बनाने में बैसला के साथ नहीं महासभा

राजस्थान गुर्जर महासभा ने कर्नल किरोड़ीसिंह बैसला के राजनीतिक पार्टी बनाने के फैसले से किनारा कर लिया है। महासभा के प्रदेशाध्यक्ष और सभी पदाधिकारियों ने बैसला का साथ देने से इनकार किया है। कालूलाल गुर्जर ने कहा, हम बैंसला के साथ नहीं हैं। सबको साथ लेकर आरक्षण की लड़ाई लडेंग़े, राजनीतिक पार्टी बनाने में साथ नहीं देंगे। कर्नल का आंदोलन हिंसात्मक हो गया था। कर्नल के अलावा भी कई संगठन आरक्षण के लिए काम कर रहे हैं, अहिंसात्मक तरीके से आंदोलन करने वाले समाज के नेताओं को साथ लिया जाएगा।
 

वसुंधरा प्रदेशाध्यक्ष, कटारिया नेता प्रतिपक्ष


जयपुर. भाजपा ने वसुंधरा राजे को राजस्थान की कमान सौंप दी है और कल तक उनकी खुलकर खिलाफत करने वाले संघनिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद देकर मना लिया है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने शनिवार शाम दिल्ली में इसका एलान किया। वसुंधरा को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के साथ ही अगले मुख्यमंत्री के स्वाभाविक उम्मीदवार के तौर पर भी प्रोजेक्ट किया गया है।
इस बीच पार्टी के निवर्तमान प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने इस्तीफा दे दिया है। कटारिया के चयन की औपचारिकता विधानसभा के बजट सत्र से पहले होने वाली विधायक दल की बैठक में पूरी होगी।
वसुंधरा राजे संभवत: ७ फरवरी को जयपुर आएंगी और ८ को पद ग्रहण करेंगी। इससे पहले वसुंधरा राजे २००२ में प्रदेश अध्यक्ष थीं और उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था। तब भाजपा को १२० सीटें मिली थीं।
सवाल उठा- ये राजस्थान है, मध्यप्रदेश का उपनिवेश नहीं

घोषणा से पहले बैठकों का दौर चला। जैसे ही फैसला सुनाया गया, पार्टी के एक प्रमुख नेता ने कहा- ये राजस्थान है, मध्यप्रदेश का उपनिवेश नहीं। कप्तानसिंह सोलंकी, सौदानसिंह, सुरेश सोनी और वसुंधरा सभी मध्यप्रदेश से हैं।

आप सब राजस्थान का फैसला कैसे कर सकते हैं। आपको राजस्थान के नेताओं की सुननी चाहिए। उनसे कहा गया कि अब तक के सर्वे में वसुंधरा की लोकप्रियता को राजस्थान में कोई नहीं छू पाया। जेटली के फीडबैक में भी सबने वसुंधरा को कमान सौंपने की बात कही थी।

पार्टी का आदेश मानना ही मेरा धर्म
पार्टी ने जो आदेश दिया है, उसके अनुसार काम करना मेरा धर्म है। मैं कार्यकर्ता हूं। पार्टी नेतृत्व का आदेश मानना मेरा कर्तव्य है। मैं समझता हूं, जो विषय है, उसमें हम सबको साथ लेकर, आत्मीयता से, संगठन के साथ जोड़कर काम करेंगे। वसुंधरा राजे और सब कार्यकर्ताओं का पूरा सम्मान रखते हुए सबको साथ लेकर चलूंगा।
-गुलाबचंद कटारिया
हम पूरी तरह एकजुट, सरकार बनाएंगे
हम पूरी तरह एकजुट हैं। पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतरेंगे और अच्छी तरह से जीत हासिल कर सरकार बनाएंगे। भारतीय जनता पार्टी एक परिवार है। इस परिवार में हम ही नहीं हैं, हमारे कार्यकर्ता भी हैं। ये एक बहुत बड़ा परिवार है और बहुत सारे सदस्यों को साथ लेकर चलने का काम करना है। सबको साथ लेकर चलेंगे। राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी को गुलाबचंद कटारिया और हम सब मिलकर आगे बढ़ाएंगे।
-वसुंधरा राजे
आगे क्या? आगे क्या?नई भूमिका
  •  वसुंधरा को संतुलित टीम बनानी होगी। इसमें संघनिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका भी जरूरी होगी।
  •  टिकट बंटवारे में वसुंधरा की ही चलेगी। पार्टी में नए समीकरण बनेंगे। सोशल इंजीनियरिंग होगी।
  •  गुलाबचंद कटारिया को लाल बत्ती और सुविधाएं तो मिलेंगी, लेकिन बजट सत्र के अलावा करने को कुछ नहीं रहेगा।

नई चुनौती
  •   पार्टी की खेमेबंदी से निबटना। सभी पक्षों को साथ लेकर चलना।
  •  चुनावी रण के लिए पार्टी को आक्रामक तेवर में लाना। सरकार को घेरने की रणनीति बनाना।
...और नई तस्वीर
  • संगठन पर अब तक संघनिष्ठ खेमे का वर्चस्व था, जो अब पूरी तरह टूट गया है।
  •  पार्टी के अग्रिम संगठनों में शामिल चेहरों में बदलाव दिखाई देगा।
  •  वसुंधरा के कमान संभालते ही प्रदेश के राजनीतिक समीकरण भी पलटेंगे। कांग्रेस संगठन में भी फेरबदल संभव है।
७ घंटे, मीटिंग दर मीटिंग ...और सुलह
शनिवार सुबह 10:३० बजे : दिल्ली में जेटली, प्रदेश प्रभारी कप्तान सिंह और सौदान सिंह आदि ने वसुंधरा राजे, कटारिया, अरुण चतुर्वेदी और घनश्याम तिवाड़ी के साथ करीब डेढ़ घंटे बैठक की। हाईकमान का फैसला सुनाया कि राजे अध्यक्ष और कटारिया नेता प्रतिपक्ष होंगे। घनश्याम तिवाड़ी बैठक छोड़ गए। कहा- परिवार का सीकर में कार्यक्रम है, जाना जरूरी है।
शाम ०५:३० बजे : राजनाथ ने कटारिया और राजे के बारे में घोषणा कर दी। इससे पहले उन्होंने शाम साढ़े 4 बजे राजस्थान के नेताओं के साथ मीटिंग की। इसमें सुषमा और अरुण जेटली भी थे।