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Founder Editor(Print): late Shyam Rai Bhatnagar (journalist & freedom fighter) International Editor : M. Victoria Editor : Ashok Bhatnagar *
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4 फ़र॰ 2013

मोदी की उम्मीदवारीः कितने सीएम साथ, कितने खिलाफ

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की पीएम उम्‍मीदवारी में राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की राय भी बहुत मायने रखती हैं। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही नरेंद्र मोदी के खिलाफ नहीं हैं, राजग शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी मोदी के बारे में अब तक अपनी राय जाहिर नहीं की है। ऐसे में नरेंद्र मोदी की पीएम उम्मीदवारी की कितनी संभावना है, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। 

भाजपा नीत राजग गठबंधन फिलहाल गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक पंजाब और गोवा में सत्‍ता में है। इनमें बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मोदी के धुर विरोधी है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री के रूप में उनकी पहली पसंद अरुण जेटली हैं। 

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बारे में अब तक कोई राय नहीं बन पाई है। वे खुद भी प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल हैं। मोदी पर मचे घमासान को देखते हुए ऐसी भी संभावना है कि अंतिम समय में पीएम उम्‍मीदवार के रूप में उनका नाम उभर कर सामने आ जाए। 

मौजूदा समय में छत्‍तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह व अकाली दल मोदी के पक्ष में है। एनडीए का विस्तार करने के लिए भाजपा की जिन दलों पर नजर है उनमें जयललिता की अन्नाद्रमुक और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस है। जयललिता मोदी को समर्थन दे सकती है लेकिन ममता बनर्जी सेक्यूलरिज्‍म के नाम पर मोदी के खिलाफ ही रहेंगी। 

राजग के अन्य सहयोगी दलों में शिवसेना सुषमा स्वराज के पक्ष में अपनी राय जाहिर कर चुकी है। हरियाणा में भाजपा की सहयोगी हरियाणा जनहित कांग्रेस भी सुषमा के साथ रहेगी, जबकि टीडीपी व तेलंगाना राष्ट्र समिति के लिए भी मोदी के नाम पर सहमत होना आसान नहीं होगा। 

बहरहाल, आगामी लोकसभा चुनाव में उतरने की तैयारी में जुटी भाजपा को अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता की कमी खल रही है, जो एनडीए के सर्वमान्य नेता थे। भाजपा मानती है कि आज का एनडीए 1996 के एनडीए से काफी अलग है। आज इसमें केवल सात दल हैं। साथ ही वाजपेयी जैसा नेता भी नहीं है।

ऐसे में अगर चुनाव बाद केंद्र में एनडीए की सरकार बनने की संभावना बनी तो राजग के घटक दल भाजपा की बजाए नेताओं के नाम पर समर्थन देंगे। मोदी के नाम पर कांग्रेस को शिकस्त देने की रणनीति पर काम कर रही भाजपा भी जानती है कि उनका पीएम तभी बन सकता है जब वह अकेले दम पर 150-160 सांसदों का आंकड़ा पार कर ले। इतनी संख्या जुटाने के बाद एनडीए का कारवां भी बढ़ जाएगा।

'पीएम पद को लेकर बयान देना बंद करें भाजपा नेता'

आगामी लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की मांग से परेशान भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आज पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को सख्त हिदायत की दी कि वे इस बारे में किसी भी तरह की बयानबाजी से बाज आएं। पार्टी के एक धडे़ की प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा की मांग के बाद पिछले कुछ दिनों से इस बारे में लगातार चल रहे कयासों पर विराम लगाने के लिए सिंह पहले भी कार्यकर्ताओं से इस बारे में संयम बरतने और बयानबाजी न करने के लिए कह चुके हैं।

सिंह ने आज यहां पत्रकारों से कहा, 'मैं भाजपा कार्यकताओं और नेताओं से अपील करता हूं कि प्रधानमंत्री पद के लिए किसी तरह की बयानबाजी न की जाए। उन्होंने कहा कि वह स्वयं कह चुके हैं कि भाजपा की परंपरा रही है कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पद के बारे में सभी निर्णय पार्टी के संसदीय बोर्ड की बैठक में लिए जाते हैं। इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए।'

राजनाथ ने सख्त लहजे में कहा कि प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार कौन होगा, कैसे होगा क्या निर्णय होगा और क्या नहीं होगा यह सब फैसले संसदीय बोर्ड की बैठक में होते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी प्रधानमंत्री पद से जुडा प्रश्न पूछा जाए तो सभी नेता यही जवाब दें कि इन बातों का फैसला संसदीय बोर्ड की बैठक में ही होता है।

उन्होंने कहा कि वैसे तो पार्टी के सभी नेता मर्यादित आचरण करते हैं लेकिन उनका फिर भी विनम्र निवेदन हैं कि इस बारे में बयान देते समय संयम बरतें। उन्होंने कहा कि किसी की भावना आहत नहीं होनी चाहिए। सिंह ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि मैं इस बारे में दोबारा अपील नहीं करूंगा। 

सिंह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब महा कुंभ में संत समाज की ओर से गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के बारे में प्रस्ताव पारित किए जाने की अटकलें हैं। खुद सिंह भी छह फरवरी को कुंभ स्नान के लिए जा रहे हैं। 

3 फ़र॰ 2013

वैवाहिक बलात्कार में भी सख्त सजा का प्रावधान

marital rape even stricter punishmentकेंद्र सरकार के प्रस्तावित अध्यादेश में वैवाहिक बलात्कार के मामले में भी सख्त सजा का प्रावधान है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए बलात्कार विरोधी कानून वाले अध्यादेश के अनुसार यदि अलगाव की स्थिति में पति ने पत्नी की बिना सहमति के सहवास किया तो उसे सात साल तक की जेल हो सकती है।

जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी ने सिफारिश की है कि आईपीसी की धारा 376 ए को खत्म किया जाय जिसके तहत अलगाव के दौरान अपनी पत्नी से यौन संबंध बनाने पर अभी अधिकतम दो साल की सजा का प्रावधान है। इसका आशय वैवाहिक बलात्कार को भी अन्य बलात्कार की परिभाषा के दायरे में लाना है। जबकि सरकार इसे बनाए रखना चाहती है लेकिन अधिकतम सजा को दो साल के बजाय सात साल करना चाहती है।

गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि हमने अधिकतम सजा तो बढ़ाई है पर इस धारा को बनाए रखना चाहते हैं ताकि दंपति को सुलह का एक अवसर मिल सके। अभी तक धारा 376 ए असंज्ञेय अपराध है पर प्रस्तावित अध्यादेश में इसे संज्ञेय अपराध माना गया है। 

जस्टिस वर्मा की सिफारिशों के अनुरूप धारा 376 ए को समाप्त करने की मांग कर रहे अनेक महिला संगठन राष्ट्रपति से इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर न करने की अपील करने की योजना बना रही हैं।

महिलाओं के साथ अपराध करने पर सशस्त्र बल के कर्मी अपने बचाव के लिए आर्म्ड फोर्सेस (विशेष अधिकार) एक्ट, 1958 का सहारा ले लेते हैं। इस पर स्थिति साफ करते हुए गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि इन कर्मियों के महिलाओं के खिलाफ ऐसे अपराध करने पर किसी तरह की मंजूरी की आवश्यकता नहीं रहेगी।

मोदी को आगे बढ़ाने को कांग्रेस ने दिए पैसेः आजम

azam khan blames congress for modiअलीगढ़/अपने बयानों से हमेशा चर्चा में बने रहने वाले प्रदेश के नगर विकास मंत्री मो. आजम खां ने शनिवार को कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी को बढ़ाने के लिए कांग्रेस ने भाजपा को मोटी रकम दी है। उनकी बात यहीं खत्म नहीं हुई बल्कि सोनिया गांधी व राहुल गांधी के बारे में बोले कि सपा ने स्वेच्छा से कांग्रेस के गढ़ रायबरेली व अमेठी संसदीय सीटें छोड़ीं हैं, अगर सपा इन दोनों सीटों पर प्रत्याशी उतार दे तो कांग्रेस के लिए दोनों सीटें जीतना भी मुश्किल हो जाएगा। ताजमहल के बारे में उन्होंने फिर कहा कि मुगल शासक ने अपने स्वार्थ की खातिर सरकारी खजाने के दुरुपयोग किया। 

आजम खां अलीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए जाने के सवाल पर आजम का कहना था कि गुजरात के मुख्यमंत्री को आगे बढ़ाने में कांग्रेस का ही हाथ है। उन्होंने कहा कि सैफई में कवि सम्मेलन में एक कवि ने टिप्पणी की कि मनमोहन सिंह को सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री बना दिया लेकिन बताया नहीं कि वह प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने कहा राहुल गांधी से बड़े खतरे हैं क्योंकि वह जहां जाते हैं, भीड़ पर डंडे बरसवा देते हैं। 

ताजमहल को लेकर दिए बयान पर आजम का कहना था कि उनके बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया। उनका कहना था कि जिस तरह से मायावती सरकार ने अपने जिंदा बुतों को लगवाने के लिए प्रदेश का सरकारी खजाना खाली कर दिया। ठीक उसी तरह से मुगल शासक शाहजहां ने अपने निजी लगाव के चलते सरकारी खजाने का दुरुपयोग कर ताजमहल को बनवाया था। सत्ता का खजाना जनता के सुखदुख के लिए होना चाहिए ना कि राजाओं की ऐशगाह बनाने के वास्ते।

‘डंडे के आदी हो गये हैं अफसर..’ इस बयान पर उन्होंने कहा कि यह एक विचार था जो उनका नहीं है। चुटकी लेते हुए बोले-आप लोग क्यों मुझसे ऐसी बातें कहलाना चाहते हैं। डंडे तो उन्होंने भी खाये तब कहीं जाकर यहां पहुंचे हैं। मायावती के शासन में जो लोग दहशतजदा रहते थे वह अब आराम है। शासन-प्रशासन अनुशासन के दायरे में है। सलमान रश्दी, तस्लीमा नसरीन सहित दूसरे लेखकों ने इस्लाम और कुरान को लेकर जो कुछ कहा है उससे दूसरे लोगों को अच्छा लगता है। अगर ऐसा है तो उनके कुछ कहने पर इतना विवाद क्यों है? अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो उनको भी है।