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2 मार्च 2013

सलमान रुश्दी के खून का प्यासा 'अलकायदा', हत्या करने वाले को मिलेंगे 20 करोड़


लंदन. भारतीय मूल के ब्रिटिश लेखक सलमान रुश्दी आतंकवादी संगठन अल-कायदा की 'मोस्ट वांटेड' सूची में शामिल हैं। उसने उन्हें जिंदा या मुर्दा पकड़ने के लिए 20 करोड़ रुपये का ईनाम रखा है। 
 
सलमान रुश्दी के खून का प्यासा 'अलकायदा', हत्या करने वाले को मिलेंगे 20 करोड़अल-कायदा ने अपनी ऑनलाइन अंग्रेजी पत्रिका 'इन्सपायर' के नए अंक में इस्लाम धर्म की निंदा करने वाले लोगों की सूची जारी की है। उसने उन्हें अपराधी की श्रेणी में रखा है। 
 
रुश्दी के खिलाफ ईरान के दिवंगत नेता अयातुल्ला खोमीनी ने 1989 में उनकी किताब 'सेटेनिक वर्सेज' के लिए फतवा जारी किया था। ईरान स्थित खोर्दान फाउंडेशन ने रुश्दी की हत्या के लिए  पूर्व में घोषित चार करोड़ रुपए के ईनाम को बढ़ाकर 20 करोड़ रुपए के करीब कर दिया है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा-यूजर चार्ज हटे बिना नहीं जीत सकते चुनाव


जयपुर.कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान को शहर कांग्रेस के नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा है सरकार ने यूजर चार्ज नहीं हटाया तो पार्टी शहर में चुनाव नहीं जीत पाएगी। शहर में सफाई नहीं होने से जनता में गहरी नाराजगी है। शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा और विधायक प्रतापसिंह खाचरियावास समेत अधिकतर नेताओं ने एक स्वर में आपत्ति जताई कि उनसे बिना पूछे ही यूजर चार्ज थोपा गया। इसे तुरंत वापस लिया जाए, वरना स्थिति बिगड़ेगी। 
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में जयपुर संभाग की फीडबैक बैठक में सांसद महेश जोशी नहीं आए। उनका नाम लिए बिना बैठक में कई नेताओं ने प्रदेशाध्यक्ष से कहा कि पार्टी को एक व्यक्ति ने जेबी संस्था बना रखी है। डीसीसी जाने पर दफ्तर बंद मिलता है। एक प्रमुख नेता के घर से ही डीसीसी चल रही है। कांग्रेस के दो नेताओं ने तो यहां तक कहा कि विधानसभा में प्रताप सिंह खाचरियावास ने यूजर चार्ज का जो मुद्दा उठाया, कायदे से उसे शहर कांग्रेस संगठन को उठाना चाहिए था। 
डॉ. चन्द्रभान ने सवेरे 11 से रात 8 बजे तक जयपुर शहर व देहात, अलवर, सीकर, झुंझुनूं और दौसा से आए कांग्रेसियों की अलग-अलग बैठक ली। वहां पार्टी की गतिविधियों, ग्राम पंचायत और वार्ड कमेटियों के गठन, सदस्यता अभियान, जनसंपर्क अभियान, राजनैतिक सम्मेलनों और पार्टी के छ: माह के कार्यक्रमों पर चर्चा की। 
ये नहीं आए : 
जयपुर शहर की फीडबैक बैठक में कांग्रेस प्रत्याशी रहे विक्रम सिंह शेखावत, सुरेश मिश्रा, माहिर आजाद और अश्कअली टाक नहीं थे। इसमें 16 ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों में से केवल 9 ही आए। 
ये नेता आए बैठक में : 
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सलीम कागजी, प्रताप सिंह खाचरियावास, गंगादेवी, बृजकिशोर शर्मा। 
 
 रूठे हुओं को मनाओ
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा में वसुंधरा राजे के प्रदेशाध्यक्ष बनने के बाद वहां प्रोग्राम ठीक चल रहे हैं। कांग्रेस को भी ऐसे प्रोग्राम करवाने चाहिए। इस पर डॉ. चंद्रभान बोले कि कांग्रेस को उनकी तरह क्या-क्या करना चाहिए, जवाब में कार्यकर्ता बोले कि आपको भी रूठे हुए कांग्रेस नेताओं को मनाने उनके घर जाना चाहिए। भाजपा अध्यक्ष राजे ये अच्छा काम कर रही हैं। इस पर चंद्रभान बोले कि अपने तो सभी मने हुए हैं। इस पर कार्यकर्ता बोले कि अपने यहां भी रूठे हुओं की कमी नहीं है। 
मंत्री जी आपको किसने रोका है
शिक्षा मंत्री बृजकिशोर शर्मा ने कहा कि आपस में गुटबाजी खत्म होनी चाहिए, फूट नहीं होनी चाहिए। कांग्रेस को समय पर विधानसभा के प्रत्याशी घोषित करने चाहिए। इस पर चंद्रभान बोले कि आप तो मंत्री हो, ये सब आप करो न, आपको किसने रोका है। 
सुनवाई नहीं होती 
कांग्रेस के कुछ ब्लॉक अध्यक्षों ने जब प्रदेशाध्यक्ष से कहा कि सरकार में उनकी सुनवाई ही नहीं होती, क्षेत्र की समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, अफसर बात नहीं सुनते ऐसे में किस मुंह से वे लोगों से वोट मांगने जाएंगे। इस पर डॉ. चंद्रभान ने कहा कि सरकार के खिलाफ कोई ऐसी बात नहीं करेगा। 
हर बूथ पर दस सदस्य 
 
डॉ. चन्द्रभान ने कहा है कि पार्टी दो माह में बूथ कांग्रेस कमेटियों का पुनर्गठन कर प्रत्येक बूथ पर दस-दस सदस्यों की टीम तैयार करेगी। 31 मार्च तक ग्राम पंचायत कांग्रेस कमेटी एवं वार्ड कांग्रेस कमेटी के गठन का कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बूथ कमेटियों के पुनर्गठन का काम 30 अप्रैल  तक पूरा किया जाना है।
 
राष्ट्रीय महासचिव आज करेंगे समीक्षा
प्रदेश कांग्रेस की फ्लैगशिप प्रोग्राम मॉनिटरिंग कमेटी के जिलाध्यक्षों एवं ब्लॉक अध्यक्षों की शनिवार को मुख्यालय में बैठक होगी। इसमें केंद्र एवं राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं की समीक्षा होगी। प्रवक्ता डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि इसमें राष्ट्रीय महासचिव, सांसद एवं फ्लैगशिप प्रोग्राम मॉनिटरिंग कमेटी के राष्ट्रीय प्रभारी विलास मुत्तेमवार, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा प्रदेश फ्लैगशिप प्रोग्राम मॉनिटरिंग कमेटी के संयोजक व सांसद अश्कअली टाक संबोधित करेंगे।
चुनावी फीडबैक लेने राहुल आएंगे
कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का लोकसभा और विधानसभा चुनाव का फीडबैक लेने के लिए जयपुर का आकस्मिक दौरा कर सकते हैं। यहां कांग्रेस के जिलाध्यक्षों और संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों से मिलने की संभावना है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी मुकुल वासनिक ने शुक्रवार को प्रदेशाध्यक्ष डॉ. चंद्रभान से इस बारे में बात की है। 
विधानसभा का बजट सत्र चलने की वजह से डॉ. चंद्रभान ने वासनिक को मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह में राहुल गांधी का दौरा करवाने का सुझाव दिया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे की बजट सत्र के बाद शुरू होने वाली चुनावी यात्रा को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी का यह दौरा होना बताया जा रहा है। हालांकि डॉ. चंद्रभान ने उन्होंने इस तरह के कार्यक्रम की कोई तिथि तय होने से इंकार किया है।

जान देकर बताई कितनी कारगर दवा, अब मुआवजा तक नहीं


जयपुर.एसएमएस मेडिकल कॉलेज में दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल के दौरान हर साल चार-पांच मौतें हो रही हैं। एथिक्स कमेटी के सदस्य इस बात की पुष्टि करते हैं। उनके मुताबिक 8 साल में किसी को भी आर्थिक सहायता मिलने का रिकॉर्ड नहीं है।
 
ड्रग कंपनियां किसी दवा को बाजार में उतारने से पहले डॉक्टरों के जरिए इन्हीं मरीजों पर ड्रग ट्रायल करके दवाओं के सही-गलत प्रभावों का पता लगाती हैं। ट्रायल के दौरान ऐसे मरीजों को कई बार दवाओं के गलत प्रभावों की कीमत चुकानी पड़ती है तो कई की मौत भी हो जाती है। इस बारे में ट्रायल कर रहे डॉक्टर मरीज की मौत की सूचना तो एथिक्स कमेटी को दे देते हैं, लेकिन उनकी ओर से हर बार मौत के कारण ट्रायल के बजाय दूसरे ही रहे हैं।
 
ड्रग ट्रायल पर निगरानी के लिए बनाई गई ड्रग सेफ्टी कमेटी ने ऐसे मरीजों की मौत के कारण खंगालने शुरू किए हैं। शुरुआती चरण में ही कमेटी की ओर से एसएमएस मेडिकल कॉलेज के बर्न एवं प्लास्टिक यूनिट के एक डॉक्टर के ट्रायल के दौरान हुई पांच मौतों के कारण खंगाले। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ट्रायल पर रोक लगा दी गई। फिलहाल कमेटी के पास करीब 10 से ज्यादा मरीजों की मौत के मामले विचाराधीन है। 
 
कमेटी के सदस्यों सहित एथिक्स कमेटी के कुछ सदस्यों ने ड्रग ट्रायल के दौरान बढ़ रही मौतों और इसको लेकर देशभर में उठ रही आवाजों के बाद ट्रायल के दौरान मरीज की मौत पर ‘नॉ फॉल्ट कंपनसेशन’ (मौत का कारण जो भी हो, मरीज को सहायता मिले) देने का मुद्दा भी उठाया है। हालांकि इस पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज में सहमति नहीं बन पा रही।
 
 
दो मामलों में सहायता राशि देने को लिखा
 
पिछले दिनों एथिक्स कमेटी की ओर से केवल दो मरीजों की मौत के बारे में बतौर सहायता राशि देने के लिए कंपनी को लिखा है। लेकिन वह राशि भी उस मरीज के परिजनों को मिली या नहीं, इस बारे में भी एथिक्स कमेटी को कोई सूचना नहीं है। कमेटी सदस्यों के मुताबिक उनका काम केवल संबंधित कंपनी को प्रपोज करना है, हर्जाना देने का काम संबंधित कंपनी की ओर से चयनित इंश्योरेंस कंपनी का होता है। 
 
1 डॉक्टर 5 ट्रायल : विरोध हुआ, सुधार नहीं 
 
मेडिकल कॉलेज के टीचर्स पढ़ाने, अस्पताल में मरीजों को देखने और दूसरे कई कार्यो में व्यस्तता के बावजूद क्लीनिकल ट्रायल में पीछे नहीं रहते। एथिक्स कमेटी की ओर से एक ही डॉक्टर को एक साथ पांच क्लीनिकल ट्रायल करने की अनुमति दे दी जाती है। इस बात को लेकर एथिक्स कमेटी के कुछ सदस्यों ने ही बैठकों में मामला उठाया कि इस संख्या को कम किया जाए, ताकि दवाइयों का ट्रायल भी ठीक हो और डॉक्टर इस दौरान दूसरे कार्यो में भी बराबर फोकस कर सके।  
 
मिलना चाहिए हक 
 
ट्रायल में शामिल सभी मरीजों को भी मिले मुआवजा। ट्रायल संबंधी ड्रग की वजह से हुई डेथ का पूरा मुआवजा हो, अन्य को नो फॉल्ट कंपनसेशन दिया जाए। इस कंपनसेशन ने लिए एकाध सप्ताह की निश्चित समयावधि तय हो, ताकि संबंधित परिजनों की भागदौड़ कम हो। मुआवजा देने की जिम्मेदारी और प्रक्रिया संबंधित ड्रग कंपनी की हो, अभी इंश्योरेंस कंपनी की होती है, जिससे मुआवजा लेने में भारी परेशानी। 
 
(डॉक्टरों सहित एथिक्स कमेटी के कुछ सदस्यों से बातचीत के मुताबिक) 
 
कमेटी को तो मिलती है फीस
 
क्लीनिकल ट्रायल के लिए संबंधित कंपनी की ओर से दी जाने वाली रकम में से एथिक्स कमेटी को कुछ प्रतिशत राशि जमा करानी होती है। एसएमएस कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. सुभाष नेपालिया के मुताबिक ‘यह बतौर कमेटी की फीस ली जाती है। यह एसओपी (स्टेंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर) सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक तय किए जाते हैं, जो कि संस्थान के चार्जेज होते हैं।’ हालांकि जिन मरीजों को केन्द्र में रखकर दवाओं के प्रयोग किए जा रहे हैं, उनको कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही।
 
क्या है गाइडलाइन
 
गाइडलाइन के मुताबिक डॉक्टर की ओर से क्लीनिकल ट्रायल से पहले पेशेंट को जानकारी देकर उसकी स्वीकृति लेना जरूरी है। ट्रायल के दौरान पूरा इलाज, दवाइयां, मेडिकली जांच मुफ्त करनी होती है। साथ ही आने-जाने के लिए कन्वेंस भी देना होता है। यदि क्लिनीकल ट्रायल के दौरान मरीज की मौत होती है तो उसकी पारिवारिक स्थिति, उसके आश्रितों आदि को देखते हुए हर्जाना (इंश्योरेंस कंपनी) भी दिया जाता है।
 
जिम्मेदार ने कहा
 
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में क्लीनिकल ट्रायल के दौरान सालाना 4-5 मौतें होती हैं। 2005 से अब तक करीब 35 हो गई। हमने दो केसेज में सहायता राशि देने के लिए कंपनी को प्रपोज किया है। प्रोसिजर में होगा। एथिक्स कमेटी की मीटिंग में इस बारे में पता करेंगे। 2005 से चल रहा है ट्रायल। मैं तो दो साल से हूं। मेरे समय में तो ये आए। ज्यादातर मौत के कारण दूसरे हो जाते हैं। मरीज क्लीनिकल ट्रायल के दौरान दवा से ही थोड़े मरे होंगे?
 
-डॉ. आरके सुरेखा एथिक्स कमेटी के सचिव

जयपुर बनेगा देश का पहला वाई-फाई शहर


जयपुर.राज्य सरकार की ओर से आगामी बजट में जयपुर को वाई-फाई सिटी बनाने की घोषणा हो सकती है। योजना के लिए लगभग 10 करोड़ बजट का अनुमान लगाया जा रहा है। इसके तहत पूरे शहर में लोगों को वाई-फाई सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। इससे लोग मुफ्त में इंटरनेट सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे। 
 
वाई-फाई नेटवर्क के लिए 300 से ज्यादा सरकारी और प्राइवेट बिल्डिंग्स पर ‘वाई-फाई हॉट स्पॉट’ बनाए जाएंगे, जिससे शहर का लगभग हर क्षेत्र वाई-फाई एनेबल हो जाएगा। सुविधा का लाभ वाई-फाई एनेबल्ड लैपटॉप, मोबाइल और अन्य उपकरणों पर लिया जा सकेगा। यूजर को 2 एमबीपीएस प्रति यूजर के हिसाब से स्पीड मिलेगी। जिससे बेहतर स्पीड से वीडियो देखे जा सकेंगे, डाउनलोडिंग, ईमेल और इंटरनेट सर्फिग की जा सकेगी। इसका खर्चा राज्य सरकार वहन करेगी।
 
 
ऐसे कर सकेंगे एक्सेस
 
यूजर अपने मोबाइल, लैपटॉप या अन्य एनेबल्ड डिवाइस से वाई-फाई ऑप्शन में जाकर कनैक्ट करेंगे तो आधिकारिक पेज खुलते ही एक यूनीक कोड फ्लैश होगा। उस कोड को विशेष नंबर पर मैसेज करना होगा। कोड मैसेज करने पर उस आधिकारिक पेज पर हर आधा या एक घंटा तय समय सीमा के लिए यूजर इंटरनेट एक्सेस कर सकेंगे। इसके बाद सुविधा का लाभ उठाने के लिए पैसा देना पड़ सकता है। 
 
सुझाव तो यह भी दिया गया है कि परमानेंट कनेक्टिविटी के लिए पेमेंट मोड का विकल्प हो। या दिन में चार बार आधा घंटा तय समय सीमा के लिए इसे फ्री कर दिया जाए। इससे यूजर हर आधा घंटे में लॉग इन करेगा तो सिक्योरिटी भी बेहतर हो पाएगी।
 
 
वाई-फाई पर विचार तो चल रहा है, लेकिन अभी तक इसके बारे में मुझे बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है।’
 
ए.एम. देशपांडे, एडिशनल डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ इंफॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी, राजस्थान सरकार
 
'वाई-फाई को लेकर फिलहाल आईटी एक्सपर्ट्स से बात चल रही है, लेकिन इसमें निष्कर्ष निकलना बाकी है।'
 
संजय मल्होत्रा, आईटी सेकेट्ररी
 
आएंगी चुनौतियां लेकिन विकल्प मौजूद
 
>सुरक्षा की दृष्टि से यूजर की पहचान जरूरी।
 
सुझाव:यूजर के किए गए मैसेज से मोबाइल या आईपी रजिस्टर हो जाएगा और इंटरनेट पर की जा रही जानकारी सुरक्षा के मद्देनजर सर्विस प्रोवाइडर के पास चली जाएगी।
 
>यूजर के सुविधा को मिसयूज करने की स्थिति में क्या?
 
सुझाव:इसके लिए कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम काम करेगा। जो धमकी भरे ईमेल लिखने या अन्य किसी खुफिया सूचना पर हरकत में आएगा और सर्विस प्रोवाइडर को इसकी सूचना देगा।
 
>यूजर क्या सर्फ करेगा? गैरकानूनी गतिविधि या पोर्न साइट सर्फ करेगा तो?
 
सुझाव:कंटेंट फिल्टर सॉफ्टवेयर और पेरेंटल कंट्रोल सिस्टम काम करेगा। जो ऐसी किसी गतिविधि को रोकने का काम करेगा और ऐसी साइटें खुलने ही नहीं देगा।
 
>क्या व्यावहारिक तौर पर पूरे शहर को वाई-फाई बनाना संभव है? क्योंकि कुछ शहरों में ऐसी योजनाएं असफल हो चुकी हैं।
 
5 साल पहले भी कवायद
 
पिछली सरकार ने आईटी कंपनियों से एमओयू साइन कर हवामहल, जंतर-मंतर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और उद्योग भवन के आसपास क्षेत्र को वाई-फाई किया था। यह पेड मॉडल होने की वजह से सफल नहीं हो पाया। इसमें यूजर को पैसे देकर काउंटर पर वाई-फाई रजिस्ट्रेशन करवाना होता था, जिसमें यूजर का काफी समय बर्बाद हो जाता था।