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4 मार्च 2013

लाठी-डंडों से पीटा, जमीन पर घसीटा, फिर मार दी गोली

dsp gunned down in upयूपी में प्रतापगढ़ ‌जिले के बलीपु‌र गांव में डीएसपी जिया उल हक को श्‍ा‌निवार की रात दबंगों ने लाठियों से पीटा, जीप से खींचकर जमीन पर घसीटा, फिर गोली मार दी। उन्हें पैरों में दो गोली मारी गई और फिर एक सीने में। 
रविवार को चार डाक्टरों के पैनल ने हक का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दो गोलियां पैर व एक गोली सीने में पाई गई। शरीर के कई हिस्सों में चोट भी लगीं थीं। चोट से ‌जाहिर था कि हक को लाठियों से पीटने के बाद गोली मारी गई।
2009 में आए पुलिस सेवा में

जिया उल हक उत्‍तर प्रदेश के एक बेहद पिछड़े जिले देवरिया के नूनखार जुआफर गांव के रहने वाले थे। 21 जनवरी 2012 को मेडिकल छात्रा परवीन आजाद से उनकी शादी हुई थी। वे स‌ीवान जिले की हैं।
2009 में राजकीय पुलिस सेवा में (पीपीएस) चुने जाने के बाद जियाउल हक नौकरी के साथ ही आईएएस की तैयारी भी कर रहे थे।
पिछले साल कुंडा में नवाबगंज के अस्थान में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद वहां तैनात क्षेत्राधिकारी (सीओ) खलीकुज्जमां को हटा दिया गया था और उनकी जगह जिया उल हक को तैनात किया गया था।
सितंबर, 2012 में कुंडा के बाघराय थाना क्षेत्र के बरना बिहरिया गांव में स्कूल में आपसी विवाद में घायल छात्र की मौत के बाद फैले सांप्रदायिक तनाव को जिया उल हक ने अपनी सूझबूझ से शांत करा दिया था।
एक साल में ही छूट गया साथ 
लखनऊ के बाबू बनारसी दास मेडिकल कॉलेज से दंत चिकित्सा की पढ़ाई कर रहीं परवीन आजाद की मेंहदी एक वर्ष के अंदर ही धूल गई। 21 जनवरी 2012 को जियाउल हक के साथ उनका निकाह हुआ था। अभी वे भविष्य की ताने-बाने ही बुन रहीं थीं कि दबंगों ने उनका सुहाग उजाड़ दिया।
रविवार को जियाउल हक को चार दिन की छुट्टी लेकर पत्नी के पास जाना था। अवकाश पर जाना था। वह एक दिन पहले ही छुट्टी का आवेदन लेकर प्रतापगढ़ गए थे। वहां से छुट्टी मिलने के बाद कुंडा चले गए।

शनिवार देर रात वह लखनऊ जाते। सीओ ने पत्नी परवीन आजाद को अपने आने के सूचना भी दे रखी थी। वे पति के आने का इंतजार कर रही थी लेकिन उनके मौत की खबर आ गई।
हक ने इंटरम‌ीडिएट तक की पढ़ाई देवरियां से ही की थी। 1998 में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में स्नातक में प्रवेश लिया। 9 वर्ष तक इलाहाबाद के मुस्लिम बोर्डिंग हॉस्टल में रहकर उन्होंने पढ़ाई और सिविल सेवा की तैयारी की थी। 2009 में उनका पुलिस सेवा के लिए चयन हुआ था।
मेरा बेटा वर्दी के लिए शहीद हो गया
जियाउल के पिता शमशुल हक (60 वर्ष) और मां पिछले काफी समय से बीमार चल रहे हैं। शमशुल हक की आंख का पिछले ही दिनों आपरेशन हुआ था तो मां का इलाज देवरिया में चल रहा है। जवान बेटे की मौत से दोनों बदहवाश हैं। 

रविवार को जब लोग उनसे मिलने पहुंचे तो उनका दर्द फूट पड़ा।

जियाउल के चचेरे भाई शाहआलम ने बताया कि चचा (जियाउल के पिता) सिर्फ यही कह रहे हैं कि उनका बेटा तो वर्दी के लिए शहीद हो गया लेकिन अगर साथी भी फर्ज निभाते तो शायद वह आज जिंदा होता।

उन्होंने कहा, 'साथ में गए साथी उसे छोड़कर भाग न निकलते और वहां मोर्चा संभालते तो शायद यह नौबत न आती। वह चार घंटा इस तरह अकेले न पड़ा रहता। उनका बेटा तो ऐसा न था। पता नहीं उसके साथ गए लोग छोड़कर क्यों भाग गए। उसने तो किसी का कुछ बिगाड़ा नहीं था जो लोगों ने उसे इस तरह मार डाला। समझ में नहीं आ रहा।

नरेंद्र मोदी के हाथ खून से रंगे हैं: वस्तावी


दारुल उलूम देवबंद के पूर्व कुलपति गुलाम मुहम्मद वस्तानवी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के हाथ खून से रंगे हैं लिहाजा वह पीएम पद के सही उम्मीदवार नहीं हैं.मुहम्मद वस्तानवी का ताजा बयान उनके पिछले बयान से ठीक उलट है जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर देश नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर चुनता है तो मुसलमानों को इससे कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए.
वस्तानवी ने कहा कि देश में भी एक बहुत बड़ा तबका है जो नरेंद्र मोदी को पसंद नहीं करता.
गौरतलब है कि मोदी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार के बारे में जब वस्तानवी का दृष्टिकोण पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘अगर अपना मुल्क उनको प्रधानमंत्री बनाता है तो हमारी तरफ से कोई इनकार तो हो ही नहीं सकता.’
वह अहमदाबाद में गुजरात सार्वजनिक वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा आयोजित ‘सामूहिक निकाह’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे, जहां 162 मुस्लिम युगल एक दूजे के हो गए.

उत्तर प्रदेश के मंत्री राजा भैया का इस्तीफा

नई दिल्ली, 4 मार्च 2013

प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने सोमवार को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. राजा भैया के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज है. उन पर प्रतापगढ़ में डिप्टी एसपी जिया उल हक की हत्या की साजिश रचने का आरोप है.
सोमवार सुबह राजा भैया ने सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ बातचीत करके इस्तीफा देने का निर्णय लिया. राजा भैया का इस्तीफा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंजूर भी कर लिया है. बदतर कानून व्यवस्था के कारण मायावती ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की थी. ऐसे में अखिलेश यादव सरकार काफी दबाव में थी.
राजा भैया के अलावा उनके चार अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी मामला दर्ज है. इस तरह के कयास थे कि पिछले दो दिनों में उत्तर प्रदेश के तीन जिलों में हिंसा, हत्या और पुलिस बल पर हमलों की घटनाओं से अखिलेश यादव सरकार के लिए विधानसभा में आने वाले दिन काफी मुश्किल भरे हो सकता हैं. अब कानून व्यवस्था के मुद्दे पर आक्रामक विपक्ष विधानसभा में अखिलेश यादव सरकार को घेरेगा.
क्या है मामला 
प्रतापगढ़ जिले में बलीपुर गांव में शनिवार शाम ग्राम प्रधान और उनके भाई की हत्या की गई थी. इसके बाद भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था. इस हमले में डीएसपी की मौत हो गई. आठ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए. पुलिस ने राजा भैया के खिलाफ केस जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की शिकायत के बाद दर्ज किया.
आजतक के पास शिकायत की वो कॉपी है, जिसे जियाउल हक की पत्नी ने पुलिस के सामने दी है. इस चिट्ठी में साफ साफ लिखा है कि डिप्टी एसपी जियाउलहक की हत्या राजा भैया के आदमियों ने करवाई है. इतना ही नहीं चिट्ठी में ये भी लिखा गया है कि हत्या से पहले जिया उलहक के साथ मारपीट की गई, और बाद में उन्हें तमंचे से गोली मार दी गई. मृतक डिप्टी एसपी की पत्नी के मुताबिक पिछले कई दिनों से जियाउल हक को धमकिया मिल रही थी.
कौन हैं राजा भैया?
बाहुबली नेता राजा भैया के नाम से पुकारे जाने वाले कुंडा से लगातार पांचवीं बार विधायक चुने गए हैं. वे कुंडा के राज परिवार से आते हैं. अकसर विवादों में रहने वाले राजा भैया सबसे पहले 1993 में कुंडा से निर्दलीय विधायक चुने गए थे. साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावाती ने राजा भैया को जेल में डाल दिया था. मायावती सरकार ने राजा भैया पर आतंकवाद निरोधक कानून यानी पोटा भी लगा दिया था.
लेकिन एक साल बाद साल 2003 में यूपी में मुलायम सिंह यादव की सरकार आते ही राजा भैया पर से पोटा हटा लिया गया. राजा भैया जेल से बाहर आए और साल 2005 में मुलायम सरकार में खाद्य मंत्री बने. पिछले साल जब यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तो राजा भैया को जेल मंत्री के साथ खाद्य मंत्री भी बना दिया गया. इसी साल फरवरी में मंत्रिमंडल फेरबदल में राजा भैया से जेल मंत्रालय ले लिया गया पर शेष मंत्रालय उनके पास अब भी हैं.

3 मार्च 2013

यमुना की रक्षा के लिए हजारों लोगों ने किया दिल्ली कूच



यमुना की रक्षा के लिए हजारों लोगों ने किया दिल्ली कूच



मथुरा. यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए मथुरा के हजारों साधु-संत और आमजनता शुक्रवार को दिल्ली कूच कर गए। दोपहर को ऐतिहासिक विश्राम घाट पर लोगों ने प्रदूषण मुक्ति का संकल्प लिया और यमुना मइया की जयकारे के साथ आगे बढ़े। इससे दिल्ली–मथुरा हाइवे पर काफी समय तक जाम लग गया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि यमुना में केवल नाले का पानी है। यह आचमन करने लायक भी नहीं रहा। यमुना को लाने की लड़ाई हथिनी कुंड से शुद्ध जल छोड़े जाने तक लड़ी जाएगी। संत रमेश बाबा ने बताया कि उन्होंने सोनिया गांधी से जल संसाधन मंत्री हरीश रावत तक से शिकायत कर ली, लेकिन कुछ नहीं हुआ। आश्वासन से देश ठगा गया है। अब हमलोगों की अंतिम लड़ाई है।

इस यात्रा की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि शुक्रवार को तीन घंटे तक सभी मंदिरों के पट बंद रहे। ताकि लोग पूरी तरह से दिल्ली कूच कर सकें। अधिवक्ताओं ने एक दिन काम बंद रखा और छात्र-छात्राएं स्कूल कॉलेज स्कूल-कॉलेज नहीं गए। दुकानदार प्रतिष्ठान बंद करके पैदल मार्च का समर्थन कर रहे हैं। सबकी तमन्ना दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार को हिलाने के लिए हिलोरें मार रही है। यमुना प्रदूषण मुक्ति की मशाल अब आमजन ने थाम ली है।