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Founder Editor(Print): late Shyam Rai Bhatnagar (journalist & freedom fighter) International Editor : M. Victoria Editor : Ashok Bhatnagar *
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11 सित॰ 2013

विपक्ष जो चाहे कर लें, हम अपना काम करेंगे -राहुल


उदयपुर. कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने राजस्‍थान के उदयपुर में एक रैली कर चुनावी बिगुल फूंका तो विपक्षी बीजेपी ने भी चुनावों की तैयारियां शुरू कर दी हैं। खबर है कि सुषमा स्‍वराज को नरेंद्र मोदी की जगह बीजेपी चुनाव अभियान समिति का अध्‍यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, राहुल ने सलंबूर में चुनावी सभा में कहा, 'विपक्ष जो चाहे कर लें, हम अपना काम करेंगे। विपक्ष मानता है कि गरीब देश पर बोझ है लेकिन हम मानते है कि गरीबों के पसीने से देश आगे बढ़ता है। गरीब, आदिवासी, दलित का हम पर भरोसा है। इसलिए हम विपक्ष का विरोध करते है। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि दिल्ली में आपके सिपाही बैठे है और आपकी लड़ाई हम लड़ेंगे संसद में।'
आज राजस्थान के आदिवासी रैली से मोदी की शहरी रैली का जवाब देंगे राहुल

नियमगिरी के रास्ते आदिवासियों में पैठ बनाने की कोशिश
 
ओडि़शा में 12 ग्राम सभाओं द्वारा वेदांता कंपनी के खिलाफ फैसला देने का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा, आदिवासियों की जमीन विपक्ष बिना पूछे उद्योगपतियों को बांट रहा था। जबकि पहाड़ आदिवासियों के देवता थे और उनकी पूजा करते है वे लोग। गरीब आदिवासी कहां जाएगा, जब उसकी जमीन चली जाएगी। राहुल ने पंचायती राज कानून का जिक्र करते हुए कहा, आम आदमी आगे आए और कानून बनाने में शामिल हो।
उनका कहना था कि कांग्रेस पार्टी गरीबों के लिए रोजगार योजना और भोजन का अधिकार लेकर आई है। जब तक गरीब को भोजन नहीं मिलेगा। देश आगे नहीं बढ़ेगा। राहुल ने खाद्य सुरक्षा बिल, रोजगार गारंटी योजना के साथ साथ ट्राइबल एक्ट का जिक्र करते हुए केन्द्र सरकार की योजनाएं गिनाई।

राजस्‍थान में राहुल ने फूंका चुनावी बिगुल, सुषमा ले सकती हैं मोदी की जगहकेन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने रैली में जुटे लाखों लोगों को गुरु शिष्य परंपरा की कहानी सुनाई। इस कहानी के माध्यम से राहुल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपना काम करती रहेगी। विपक्ष को जो करना है कर लें।
 
आम आदमी की कहानी:
 
राजस्थान सरकार की निशुल्क दवा योजना और सस्ते दरों पर खाद्यान्न वितरण योजना की तारीफ करते हुए राहुल ने कहा कि यूपी में एक बार मैंने लोगों से पूछा कि भाई, कुछ अपनी जिंदगी के बारे में बताओ। उन्होंने ने कहा, राहुल जी हम लोग मजदूर आदमी जितना कमा नहीं पाते उतना दवाओं में चला जाता है। दो दिन काम करते है, लेकिन खाना नहीं मिलता। फिर बुखार आ जाता है और जो कमाये रहते वो दवाईयों में चला जाता है। आखिर में राहुल ने अपने आदिवासी समर्थकों को उनके स्वागत और नृत्य के लिए धन्यवाद दिया। 
 

25 अग॰ 2013

गिरा कौन रुपया या हम



राकेश माथुर
मीडिया बड़े जोर शोर से कह रहा है कि रुपया तो 70 छूकर भी 60 या 50 पर लौट आएगा लेकिन सरकार जिम्मेदारी समझे यह असंभव ही है। किंतु समझानी ही होगी। चाहे ऐसे गैर जिम्मेदार मंत्रियों को चुन चुन कर चुनाव में हराना पड़े। नए चुने कम धोखा देंगे-ऐसा जरूरी नहीं है। किंतु धोखा देने के लिए हम किसी को 10 साल क्यों देंगे तब तो न रुपया कमजोर होगा न सरकार बल्कि हम ही होंगे, कमजोर, पुरजोर कमजोर।
भारत में रुपया डालर के मुकाबले गिर रहा है। भारत में लोग सरकार को गालियां दे रहे हैं। खुद अमेरिका में क्या हालत है किसी ने तुलना की है नहीं क्यो क्योंकि हमारे यहां एक मानसिकता है..प्याज महंगी हो रही है मनमोहन सिंह इस्तीफा दें, कोयला मंत्रालय से फाइलें गायब हो रही हैं मनमोहन सिंह इस्तीफा दें। दिल्ली में किसी ने किसी से बलात्कार किया है प्रधानमंत्री या शीला दीक्षित इस्तीफा दें। गुजरात में कुछ होता है उसकी खबर या तो बाहर ही नहीं आती या आती भी है तो किसी की हिम्मत नहीं जो मोदी से उसी तर्ज में इस्फीफा मांग लें। कहीं ये पेड न्यज या पेड आर्टिकल का मामला तो नहीं हैं। लेकिन जनता समझदार है यह कर्नाटक के चुनाव से साबित कर दिया। लोकसभा उपचुनाव की दो सीटें कांग्रेस की झोली में डालकर।
डालर के मुकाबले रुपए के गिरने से अर्थशास्त्री क्या सोचते हैं यह अलग मुद्दा है। अमीरों के दिक्कत होती है क्योंक वे अपने बच्चों को विदेश पढ़ने भेजते हैं उनका खर्च बढ़ जाता है, जो लोग विदेश घूमने जाते हैं ऐश करने जाते हैं उनका खर्च बढ़ जाता है, लाखों करोड़ों की आलीशान गाड़ियों में घूमने वालों को ज्यादा पैसे पेट्रोल पर खर्च करने पड़ते हैं, सोचने की बात है एक करोड़ रुपए की हमर में या 80 लाख की कार में घूमने वाले या हेलिकाप्टरों में चलने वाले पेट्रोल या डीजल के बढ़े 80 पैसे या एक रुपए देने में ऐसे चिल्लाते हैं मानो सरकार ने उनसे उनकी जिंदगीभर की कमाई छीन ली हो। एसी कमरों में बैठने वाले और कभी बाजार से कुछ न खरीदने वाले बयान देते हैं शहरों में अमीर कौन गावों में गरीब कौन। 
प्याज महंगी क्यों हो रही है.टमाटर सस्ता होने पर कौन फेंक देता है या आलू सस्ते होंते हैं तो ट्रैक्टरों से कुचलता कौन है..आखिर कौन है जो हमारे देश में महंगाई को रुपने नहीं देता।
क्या आप जानते हैं कि डालर के गुण गाने वाले और डालर के बहाने अपने देश को गाली देने वाले नहीं जानते अमेरिका की हालत क्या है। वहां एक ट्रेन दुर्घटना होती है ट्रेन कंपनी दीवालिया होने की अर्जी दे देती है ताकि लोगों को मुआवजा न देना पड़े। कार बनाने वाला सबसे बड़ा शहर दीवालिया होने की अर्जी कोर्ट में लगाता है। क्या आप भारत की किसी कंपनी या शहर का नाम बता सकते हैं जिसने दीवाला निकलने की अर्जी दी हो। अमेरिका में किसी ने राष्ट्रपति ओबामा का इस्तीफा नहीं मांगा। वहां के आर्थिक संकट की जानकारी है.संसद को प्रस्ताव पारित कर दस साल के लिए कटौती करनी पड़ी। कितने हजार लोगों की नौकरियां गईं, मनमोहन सरकार से इस्तीफा मांगने वालों और अमेरिका के गुणगान करने वालों से पूछें। कितने लोगों को जबरन अवैतनिक अवकाश लेने पड़ रहे हैं जरा पूछिए भावी संभावित भावी प्रधानमंत्री से। वे अमेरिकी पद्धति भारत में लागू करना चाहते हैं।
भारत में अमेरिका की तरह प्रधानमंत्री पद के लिए खुली बहस के जरिए चुनाव करवाने की वकालत भाजपा के बड़े नेता ने की है। वे भूल गए कि अमेरिका में प्रधानमंत्री का पद नहीं है और सीधे चुने हुए राष्ट्रपति की हर नियुक्ति को सीनेट की मंजूरी लेनी होती है। भाजपा के वे नेता राज्यसभा में ही पार्टी के नेता हैं लेकिन क्या वे बता सकते हैं कि राज्यसभा ऐसी नियुक्तियों को मंजूरी देती है क्या। मनोमहन सिंह राज्यसभा के सदस्य हैं उन्हें कहते हैं कि वे निर्वाचित नहीं है।
अरे किसी एक पार्टी का समर्थन करो कोई नहीं रोकता लेकिन सफेद झूठ तो मत बोलो। ये जनता है सब जानती है। तथ्यों को न छुपाओ। यूरोप के कितने देशों को वित्तीय संकट से निकलने के लिए बेलआउट लेने पड़े। क्या क्या गिरवी रखना पड़ा ये भी तो बताओ। गरीब रिक्शावाले को डालर से क्या मिलेगा डालर एक रुपए का रहे या सौ का उसकी सेहत पर क्या फर्क पड़ता है। पटरियों के किनारे रहने वालों को डालर का तो नाम भी नहीं मालूम। भारत से समान निर्यात करने वालों को तो ज्यादा रुपए मिलेंगे। एक जमाना था एक डालर के बदले मुझे 16 रुपए मिले थे, आज मेरा बेटा खुश है उसे हर डालर के बदले 60 से 63 रुपए मिलते हैं। मंहगाई की बात करने वाले बताएं 1947 में वेतन कितना था, कार कितने लोगों के पास थी, उसकी तुलना में आज वेतन कितना है, कार किसके पास नहीं है। तब का एक रुपया आज सुनार की दुकान पर मिलता है।
भारत को हिंदुस्तान बताने वालों यह भी बताओ हमारे संविधान में खुद हमने देश का नाम क्या रखा है। मेरा दावा है देश के 98 प्रतिशत लोगों को अपने देश का नाम नहीं मालूम कुछ मेरे जैसे हो सकते हैं लेकिन दो प्रतिशत से ज्यादा नहीं है।

24 अग॰ 2013

84 कोसी यात्रा के मद्देनजर 70 VHP कार्यकर्ता गिरफ्तार


अयोध्या में रविवार से प्रस्तावित 84 कोसी परिक्रमा यात्रा के मद्देनजर विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के 70 नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है. वीएचपी अपनी 84 कोसी परिक्रमा शुरू करने पर अड़ी हुई है, जबकि प्रदेश सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी है.
File photoफैजाबाद जिला प्रशासन ने इन नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुका था. इस बीच, अयोध्या और फैजाबाद में पुलिस बल की भारी संख्या में तैनाती कर दी गई है. फैजाबाद के जिला मजिस्ट्रेट विपिन कुमार द्विवेदी ने फैजाबाद में बताया कि अशोक सिंघल, प्रवीण तोगड़िया और राम विलास वेदांती सहित अन्य नेताओं के खिलाफ वारंट जारी किये गये हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने सांप्रदायिक माहौल बिगड़ने की आशंका से इस यात्रा पर पाबंदी लगा दी है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, वीएचपी के 20 कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया है जबकि वेदांती सहित कुछ वरिष्ठ नेता भूमिगत हो गये हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार ने वीएचपी कार्यकर्ताओं के आवागमन के बारे में खुफिया जानकारी साझा करने के लिए पडोसी राज्यों से मदद मांगी है.
'40 से 50 हजार कार्यकर्ताओं के भाग लेने की उम्मीद'
पुलिस महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) राजकुमार विश्वकर्मा ने लखनऊ में से कहा, ‘वीएचपी की 25 अगस्त से प्रस्तावित 84 कोसी परिक्रमा के सिलसिले में पड़ोसी राज्यों से खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान का आग्रह किया गया है.’ जिला प्रशासन ने इस यात्रा में वीएचपी के 40 से 50 हजार कार्यकर्ताओं के भाग लेने की उम्मीद जताई है.
द्विवेदी ने कहा कि फैजाबाद में करीब एक दर्जन पुलिस दल विहिप नेताओं के विभिन्न ठिकानों पर नियमित छापे मार रहे हैं.
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने सिंघल को इलाहाबाद से आते वक्त अयोध्या जाने की अनुमति नहीं दी. उन्होंने कहा कि अयोध्या और फैजाबाद में पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बल तैनात किये गये हैं.
यह पूछे जाने पर कि क्या फैजाबाद जिले की सीमा सील की जाने वाली है, विश्वकर्मा ने कहा कि इस संबंध में परिस्थितियों को देखते हुए निर्णय किया जायेगा. मगर फिलहाल ऐसी कोई रोक नहीं है और कोई भी शहर की यात्रा कर सकता है. विश्वकर्मा ने कहा कि केवल उन्हें ही अयोध्या जाने से रोका जायेगा जो यात्रा में भाग लेने की नीयत से जा रहे होंगे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि इस बात की शिनाख्त कैसे होगी कि कौन परिक्रमा में भाग लेने जा रहा है.
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
विश्वकर्मा ने बताया कि फैजाबाद में शांति और व्यवस्था बनाये रखने के लिये पीएसी की 13 और आरएएफ की तीन कंपनियों के अलावा दो पुलिस अधीक्षकों, 19 अपर पुलिस अधीक्षकों, 42 पुलिस उपाधीक्षकों, 135 निरीक्षकों, 430 उपनिरीक्षकों और 1300 सिपाहियों की तैनाती की गयी है.
प्रस्तावित 84 कोसी अयोध्या परिक्रमा पथ फैजाबाद के अलावा बस्ती, बाराबंकी, गोंडा, बहराइच और अंबेडकर नगर जिलों से होकर गुजरता है.
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने फैजाबाद और उसके आसपास के जिलों के पार्टी विधायकों के साथ बैठक करके वीएचपी की प्रस्तावित परिक्रमा के मद्देनजर उनके क्षेत्रों में उपजी परिस्थितियों की जानकारी ली.
मुख्यमंत्री ने पार्टी विधायकों से हालात पर करीबी नजर रखने और जो भी स्थिति हो उससे उन्हें और पार्टी को अवगत कराते रहने के निर्देश दिये.


कर्नाटक उप चुनाव में दोनों सीटों पर कांग्रेस की जीत

बेंगलुरु।। कर्नाटक में लोकसभा की दो सीटों के लिए हुए उप चुनाव में कांग्रेस को सफलता मिली है। कांग्रेस ने बेंगलुरु रूरल और मंड्या सीट पर बड़े अंतर जीत हासिल की है। इन दोनों सीटों पर 21 अगस्त को वोटिंग हुई थी। 

उप चुनाव में जेडीएस को दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। जेडीएस कैंडिडेट्स को बीजेपी का भी समर्थन मिला हुआ था। बेंगलुरु रूरल सीट पर कांग्रेस कैंडिडेट डीके सुरेश ने पूर्व सीएम एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनीता कुमारास्वामी को हराया है। मंड्या सीट पर कांग्रेस ने कन्नड़ फिल्मों की ऐक्ट्रेस राम्या को उतारा था। उन्होंने अपने राइवल जेडीएस के सीएस पुट्टाराजू को धूल चटाई। 

इस जीत पर कांग्रेस महासचिव और कर्नाटक प्रभारी दिग्विजय सिंह लोगों का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की यह जीत दिखाती है कि जनता क्या चाहती है। गौरतलब है कि ये दोनों ही सीटें पहले जेडीएस के पास थी। यह जीत कांग्रेस के लिए इसलिए भी अहम है, क्योंकि जीत का अंतर काफी ज्यादा रहा है।