newspaper

Founder Editor(Print): late Shyam Rai Bhatnagar (journalist & freedom fighter) International Editor : M. Victoria Editor : Ashok Bhatnagar *
A newspaper with bold, open and democratic ideas {Established : 2004}

28 अक्टू॰ 2012

मनमोहन मंत्रिमंडल का बदला चेहरा, 22 मंत्रियों ने ली शपथ


नई दिल्ली: प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कैबिनेट में आज सात कैबिनेट मंत्री और 15 राज्य मंत्री शामिल हुए।

मंत्रिमंडलीय विस्तार में के रहमान खान और चंद्रेश कुमारी जैसे नये कैबिनेट मंत्री भी हैं। पांच राज्य मंत्रियों दिनशा पटेल, एमएम पल्लम राजू, हरीश रावत, अजय माकन और अश्वनी कुमार को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी और फिल्मों से राजनीति में आये चिरंजीवी को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया है। शशि थरूर ने राज्य मंत्री के रूप में दो साल बाद कैबिनेट में वापसी की है।

विस्तार में 12 नये राज्य मंत्रियों ने शपथ ली। तारिक अनवर (महाराष्ट्र), के सुरेश (केरल), ए एच खान चौधरी, अधीर रंजन चौधरी और दीपा दासमुंशी (पश्चिम बंगाल), एस सत्यनारायण, के जे रेडडी, पी बलराम नाइक और किल्ली कृपारानी (आंध्र प्रदेश) राज्य मंत्रियों के रूप में कैबिनेट में शामिल किये गये हैं।

लालचंद कटारिया (राजस्थान), रानी नाराह (असम) और निनांग एरिंग (अरूणाचल प्रदेश) ने भी राज्य मंत्रियों के रूप में शपथ ली। 

मंत्रियों और उनके विभाग 

सलमान खुर्शीद होंगे नये विदेश मंत्री।

पवन कुमार बंसल नये रेल मंत्री।

जयपाल रेडडी को विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान।

अश्वनी कुमार बने कानून मंत्री। 

रहमान खान को अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय।

अजय माकन- आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्री।

दिनशा पटेल- खान मंत्री।

पल्लम राजू- मानव संसाधन विकास मंत्री। 

हरीश रावत- जल संसाधन मंत्री।

चंद्रेश कुमारी- संस्कृति मंत्री।

वीरप्पा मोइली- पेट्रोलियम मंत्री।

ज्योतिरादित्य सिंधिया- बिजली राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)।

सचिन पायलट- निगमित मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)। 

चिरंजीवी- पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)।

तारिक अनवर- कृषि राज्य मंत्री।

22 अग॰ 2012

आखिर क्यों करवाई सेनापति ने राजनेताओं की जासूसी

राकेश माथुर<><><>

- क्या चाहते थे जनरल वीके सिंह
- 18 करोड़ रुपए के बजट में बनाई थी टैक्नीकल सपोर्ट डिविजन
- सीधे जनरल वीके सिंह को रिपोर्ट करती थी यह डिविजन
- जांच के आदेश

सेनापति जनरल वीके सिंह अब रिटायर होकर अन्ना हजारे और बाबा रामदेव की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम से जुड़ गए हैं। वे वर्तमान केंद्र सरकार को भ्रष्ट बता रहे हैं। अन्ना हजारे के मंच पर नए राजनीतिक विकल्प की बात करते हैं। यह साबित करने के लिए काफी है कि हमारे देश की राजनीतिक व्यवस्था बनाने वालों ने सेना को इस तरह ढाला है कि वह चाहकर भी देश की सत्ता पर सीधे कब्जा न कर सके।

मुझे याद है जब केंद्र में सरकारें टिक नहीं पा रही थीं, चौधरी चरण सिहं संसद का सामना किए बिना इस्तीफा दे आए थे और कार्यवाहक प्रधानमंत्री थे तब के सेनापति जनरल ओपी मल्होत्रा ने कहा था कि सेना सत्ता संभालने को तैयार है, लेकिन अभी ऐसा मौका नहीं आया है। पाकिस्तान होता तो सेना ने शायद सत्ता पर कब्जा कर लिया होता।
अब नए सेना अध्यक्ष ने पता लगा लिया है कि जनरल वीके सिंह शायद सत्ता में आने का रास्ता सेना के माध्यम से खोज रहे थे। राजनेताओं को भ्रष्ट बताने वाले जनरल सिंह ने केंद्रीय मंत्रियों व अन्य राजनेताओं के फोन टैप करने के लिए सेना में एक नई शाखा बनाई थी। इसके लिए बाकायदा 1-2 नहीं 18 करोड़ रुपए के बजट का इंतजाम किया था। कहां से और कैसे इसका खुलासा करने के लिए जांच शुरू हो गई है।
नेताओं की जासूसी करने वाला सेना का यह विभाग सीधे सेनाध्यक्ष यानी जनरल वीके सिंह को रिपोर्ट करता था। जनरल सिंह सरकार से अपना कार्यकाल एक साल बढ़वाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चले गए थे। शायद जासूसी इसलिए भी करवा रहे होंगे कि नेताओं को ब्लैकमेल करवा सकें। यह कह सकें कि फलां का फोन आया था आपने इतने पैसे या फायदा मांग कर फलां को यह लाभ पहुंचाया था। लेकिन शायद एके एंटनी और प्रणब मुखर्जी उनके पल्ले पड़े। ये सख्तजान लोग बाकी कांग्रेसियों से अलग निकले।
जनरल सिंह का दांव खाली गया तो जनरल तेजिंदर सिहं पर 14 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश का इल्जाम लगा दिया। रिटायर हो चुके ले. जनरल तेजिंदर ने जनरल सिंह पर मानहानि का मुकदमा ठोक दिया। यह अभी कोर्ट में चल रहा है। ले. जनरल तेजिंदर सिंह डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के प्रमुख थे। आखिर उनसे जनरल सिंह की क्या दुश्मनी थी। सेना ने बाकायदा प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उन पर आरोप क्यों लगाए। जबकि उसकी कोई जरूरत नहीं थी। शायद अब खुलासा हो जाए। कहा गया था कि तेजिंदर मीडिया को सेना की गोपनीय बातें लीक कर रहे हैं। हकीकत क्या थी। कहीं ऐसा तो नहीं था कि जनरल सिंह ने उन्हें नेताओं की जासूसी करने को कहा हो और इनकार करने पर उन्हें फंसा दिया गया हो। कुछ भी हो सकता है।
जनरल सिंह ने नेताओं की जासूसी के लिए नया तरीका निकाला था। सेना की नई शाखा बनाई थी। नाम रखा था टैक्नीकल सपोर्ट डिविज़न। मालूम था कि मंत्रियों का काम बहुत गोपनीय होता है। हर कोई उनके दफ्तर में घुस नहीं सकता। सेना के नाम पर उन्हें कोई रोक नहीं सकता। सो टैक्नीकल सपोर्ट के नाम पर वे हर उस मंत्री के दफ्तर में घुसे जिससे उन्हें लाभ हो सकता था। यह डिविज़न उन्होंने खुद बनाई। अपने ही व्यक्तिगत नियंत्रण में रखी। 18 करोड़ रुपए इसके खर्च के लिए सेना के बजट से निकाले। अब इस डिविज़न को भंग करने का फैसला लिया गया है।
नए सेनापति जनरल विक्रम सिंह ने इसे भंग करने से पहले यह पता लगाने के आदेश दिए हैं कि आखिर इसने किया क्या क्या। किस किस मंत्री को फंसाने की साजिश थी। इतना बजट कहां से आया। इससे जनरल सिंह ने क्या क्या लाभ उठाया। कौन कौन से अतिसंवेदनशील मुद्दों की जानकारी चोरी छिपे जनरल सिंह अपने साथ ले गए। देश के लिए वह कितना बड़ा खतरा हैं या उनसे कोई खतरा नहीं है।
यह पता लग गया है कि इस डिविज़न का कोई सामरिक महत्व नहीं था। फिर यह सीधे सेनाध्यक्ष को क्यों रिपोर्ट करती थी। इसकी जांच हो रही है। आरोप यह भी है कि इस डिविजन को मोबाइल फोन टैप करने के दो अत्याधुनिक उपकरण दिए गए थे। कौन जिम्मेदार था। उसे क्या क्या जिम्मेदारी सौंपी गई थी। असल मकसद क्या था। किस का क्या फायदा हुआ। उस पर खर्च होने वाले 18 करोड़ रुपए कहां से कैसे किस मद में निकाले गए। उसके उपयोग की इजाजत किसने दी। ये वे कुछ सवाल हैं जिनके जवाब जांच में सामने आएंगे। यह सब पता लगाने के लिए तीन सितारा लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति बनाई गई है। रिपोर्ट कब तक आएगी अभी यह तय नहीं है।

11 अग॰ 2012

हिमाचल में बस घाटी में गिरी, 40 की मौत

शिमला : हिमाचल प्रदेश के चम्बा जिले में शनिवार सुबह यात्रियों से खचाखच भरी एक बस के सड़क से फिसलकर घाटी में गिरने से कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी पुलिस ने दी। यह निजी बस चम्बा की ओर आ रही थी तभी वह शहर से करीब 10 किलोमीटर की दूरी पर राजेरा के निकट एक घाटी में जा गिरी।

पुलिस अधीक्षक कुलदीप शर्मा ने बताया, `40 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।` उन्होंने कहा कि यह अब तक पता नहीं चल सका है कि हादसे के समय बस में कितने यात्री सवार थे। उन्होंने कहा कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। मरने वालों में अधिकांश चम्बा के रहने वाले थे। यह दुर्घटना राजधानी से करीब 475 किलोमीटर की दूरी पर हुई। इस इलाके में पिछले कुछ दिनों से मध्यम से तेज बारिश हो रही है।

इंजीनियरिंग कॉलेजों में जीरो सेशन का खतरा

कोटा।

इंजीनियरिंग में प्रवेश दिलवाने के लिए बहुत तेजी से एजुकेशन हब के रूप में उभरे कोटा के सामने अब नया संकट आ गया है। राजस्थान में इंजीनियरिंग का क्रेज जितनी तेजी से शुरू हुआ था अब उतनी ही तेजी से घटने लगा है।

इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तो साल-दर-साल बढ़ती जा रही है, लेकिन विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। आरपीईटी की पहली काउंसलिंग और अपवर्ड मूवमेंट के बाद राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों की आधी से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। हालांकि अभी काउंसलिंग के अगले दौर और सीधे प्रवेश की छूट शेष है, लेकिन एआई-ईईई व अन्य कॉलेजों में सीधे प्रवेश के विकल्प होने के कारण सीटें भरती नजर नहीं आ रही हैं।

पिछले साल भी इंजीनियरिंग कॉलेजों में करीब पन्द्रह हजार सीटें खाली रह गई थीं। आरपीईटी प्रवेश प्रक्रिया में अभी एक माह शेष होने से पहले ही कॉलेजों ने हार मानना शुरू कर दिया है।

जयपुर के एक कॉलेज ने पहली काउंसलिंग में गिनती के विद्यार्थी आने पर आरटीयू में जीरो सेशन के लिए आवेदन करते हुए विद्यार्थियों को दूसरे कॉलेज में स्थानान्तरित करने की अपील की है।

यह है राजस्थान के कालेजों की स्थिति

139 - इंजीनियरिंग कॉलेज
61571 सीटें
65 हजार ने दी आरपीईटी
24040 सीटों के अलॉटमेंट के बाद विद्यार्थियों ने उपस्थिति दी (प्रथम काउंसलिंग में)
39531 सीटें अपवर्ड मूवमेंट के लिए रहीं।
4969 विद्यार्थियों को सीटें अलॉट की गई अपवर्ड मूवमेंट में
34562 सीटें प्रदेश के कॉलेजों में रिक्त बचीं